जिस को तुम भूल गए कौन करे याद उसको
जिसको तुम याद हो वह और किसे याद करे
Josh Maleehabadi
इस राहे मुहब्बत में तू साथ अगर होता
हर गाम पे गुल खिलते खुशबू का सफ़र होता
Alam Tab Tashna
वो भी क्या लोग थे आसान थी राहें जिनकी
बंद आँखें किये इक सिम्त चले जाते थे
अक्लो दिल ख्वाबो हकीक़त की न उलझन न ख़लिश
मुख्तलिफ़ जलवे निगाहों को न बहलाते थे----सफ़र आसान था तो मंजिल भी बड़ी रौशन थी आज किस दर्जा पुरअसरार हैं राहें अपनीकितनी परछाईयाँ आती हैं तजल्ली बनकरकितने जलवों से उलझती हैं निगाहें अपनीAale Ahmad Suroor
दुनिया से जा रहा हूँ कफ़न में छुपाए मुंह अफसोस बाद मरने के आई हमें हयाUnknown
हिज्र की रात काटने वाले क्या करेगा अगर सहर न हुईUnknown