Urdu Kavita
Friday, February 18, 2011
रोज़ का आना जाना
गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है अमीर
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
Amir Minaai
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देर लगी आने में तुमको शुक्र है फिर भी आए तो
आस ने दिल का साथ न छोड़ा वैसे हम घबराए तो
Andalib Shadaani
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